पिताजी था या पतिजी? साध्वियों और बच्चियों से अपने लिए करवा चौथ का व्रत रखवाता था राम रहीम.

अंध भक्ति के नाम पर लोगों को बेवकूफ़ बनाने, महिलाओं और साध्वियों का बलात्कार करने, पुरुषों को नपुंसक बनाने, अपने ख़िलाफ़ जाने वालों को कथित तौर पर मरवाने जैसे ख़ुलासे कम नहीं थे कि 'फ़र्ज़ी बाबा' राम रहीम के डेरे से एक और ख़ुलासा हुआ है.

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हिंदी न्यूज़ चैनल ABP ने अपनी न्यूज़ स्टोरी में ये ख़ुलासा किया है कि बाबा डेरे की बच्चियों और साध्वियों से करवा चौथ का व्रत रखवाता था. वो उन्हें कहता था कि किसी आम इंसान के लिए करवा चौथ का व्रत रखने से कोई फल नहीं मिलेगा, उन्हें उसके लिए व्रत रखना चाहिए.


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जिस डेरे की सभी महिलाएं उसे 'पिताजी' कहती थी, उसी आदमी ने अपने स्वार्थ के लिए इन महिलाओं और बच्चियों से बाप-बेटी के रिश्ते पर ऐसे लांछन लगवाया. 

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ऐसे ही एक करवा चौथ की वीडियो में राम रहीम इन महिलाओं के लिखे हुए मेसेज पढ़ रहा है, 'लोग व्रत रखते हैं सिर्फ़ उनके लिए, जो उनका सुहाग हैं. हम तो रखते हैं व्रत अपने 'पापा' के लिए, जो दोनों जहानों के सुहाग हैं.' इस दिन वो स्टेज पर बैठ कर राम रहीम उन्हें अपने व्रत खोलने का आदेश देता था. डेरे की हर महिला 'पिताजी' को अपना आध्यात्मिक पति मानती थी.

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ये सोच कर ही हैरानी हो रही है कि किसी आदमी का कद इस हद तक कैसे बढ़ सकता है कि वो लोगों से कुछ भी करवाने की हिम्मत रखने लगे? बाहर से देखने में हमें ये बेतुका लगेगा, लेकिन जिन लोगों को उसने अपने वश में कर लिया था, उनके लिए उसकी बात पत्थर की लकीर से काम नहीं थी.