ट्रंप और PM मोदी की मुलाकात चीन पड़ सकती है भारी

ट्रंप और PM मोदी की मुलाकात चीन पड़ सकती है भारी 

आसियान सदस्य देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने फिलीपिंस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते द्वारा आयोजित रात्रि भोज में एक-दूसरे से संक्षिप्त बातचीत भी की। उनके सम्मान में पसाय सिटी के एसएमएक्स सम्मेलन केंद्र में इस रात्रि भोज का आयोजन किया गया था।
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पीएम और ट्रंप की मुलाकात अहम 
पीएम की 5 महीने के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ यह दूसरी मुलाकात है। यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है जिसकी वजह यह है कि ट्रंप के आने के बाद अमेरिका ने दक्षिण एशिया की नीति में बदलाव किया है और उसमे भारत की ओर झुकाव दिखता है। मोदी और ट्रंप की मुलाकात को चीन के मद्देनजर भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चीन को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर घेरने के लिए अमेरिका इन दिनों जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के साथ एक चतुर्पक्षीय गठबंधन बनाने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इसके साथ ही दोनों देश हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के मुद्दे पर भी चर्चा कर सकते हैं।

ट्रंप कर चुके हैं मोदी की तारीफ
मनीला रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा था कि फिलीपींस की उनकी यात्रा एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत आसियान सदस्य देशों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। पीएम कल डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। बता दें कि शुक्रवार को ट्रंप ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि वे इतने विशाल देश के लोगों को एक साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

बैठक में कई देश लेंगे भाग
मोदी  इंदिरा गांधी के बाद फिलीपींस की यात्रा पर आने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री हैं। वह कल फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते से भी मुलाकात कर सकते हैं जो वर्तमान समय में आसियान के अध्यक्ष हैं। मोदी क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी की बैठक में भी भाग लेंगे जिसमें आसियान के 10 सदस्य देशों के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस बैठक में आसियान के सदस्य देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नयी दिशा देने पर विचार-विमर्श होगा और व्यापारिक अड़चनों को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे ताकि लोगों इसका फायदा मिल सके और उत्पादों के आयात-निर्यात में बढ़ोतरी हो सके।