पुलिस की रेड में 22 लड़कियों के साथ मिली एक 9 साल की मासूम, इसकी कहानी जान रोंगटे खड़े हो जायेंगे

पुलिस की रेड में 22 लड़कियों के साथ मिली एक 9 साल की मासूम, इसकी कहानी पढ़ रोंगटे खड़े हो जायेंगे आपके 

भारत में बच्चियां सुरक्षित नहीं है इस बात में कोई शक नहीं है. क्यों कि ऐसे बहुत से लोग है जो बच्चियों को बेच कर पैसे कमाने के लालच में उनकी ज़िन्दगी तबाह कर देते हैं. कुछ ऐसा ही मामला हाल ही में मंदसौर से सामने आया है. जहाँ एक पुलिस को छापेमारी के दौरान 22 लड़कियों के साथ एक 9 साल की मासूम बच्ची भी मिली है. जानकारी के अनुसार पुलिस को ये बच्ची सुठोंद के डेरे में मिली थी. पुलिस को पूरा शक है कि इस बच्ची को खरीदा गया है.
लेकिन रेड दौरान मिली पीपाबाई का कहना है कि उसने वो बच्ची गोद ली थी. पीपाबाई ने कहा कि वह और उसकी बच्ची बेक़सूर हैं क्यों कि रविवार को वह अजय टॉकीज के पास स्थित घर में सो रही थी,जब पुलिस ने उसको और उसकी बच्ची को पकड़ लिया. केवल यही नही बल्कि, मंगलवार को पीपाबाई पुलिस के पास अपनी ज़ायदाद के पेपर लेकर पहुंची और कहा कि उसकी बच्ची को छोड़ दिया जाये उसकी पूरी जायदाद भी वह उस बच्ची के नाम कर चुकी है. जबकि, पुलिस ने इसको पीपाबाई की चाल समझ के बच्ची को छोड़ने से इनकार कर दिया. चलिए जानते हैं आखिर इस बच्ची का इस रेड से क्या ताल्लुक था…

ह्यूमन ट्रैफिकिंग का है ये मामला


आपको ये जानकार हैरानी होगी कि ये पूरा मामला ह्यूमन ट्रैफिकिंग का था. बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि पीपाबाई, जो की बच्चो गोद लेने का दावा कर रही थी, वह मंगलवार को उनके पास ब्यान देने नहीं पहुंची.लिके ने जब एडवोकेट कमल चौधरी से पूछताछ की तो उसने बताया कि पीपाबाई ने उस बच्ची को कानूनी तौर पर गोद लिया था. इसके इलावा वह दोनों पिपलियामंडी निवासी थीं. आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि पुलिस ने जिस्म फरोशी करने वाली लड़कियों के एक अड्डे पर रेड मारी थी. जिसमे उन्होंने 23 लड़कियों को हिरासत में लिया उनमे से इस नो साल की बच्ची के इलावा और भी कईं लडकियाँ नाबालिग थीं.

मेघनगर निवासी हैं बच्ची के असली माँ-बाप

पुलिस को दीये गये एक ब्यान के अनुसार एडवोकेट चौधरी ने बताया कि बच्ची पूरी तरह से कानून के नियम अनुसार पीपाबाई ने गोद ली थी. केवल यही नहीं बल्कि बच्ची के असली माँ बाप मेघनगर में रहते हैं. चौधरी ने बताया कि बच्ची के पिता मजदूर थे जिसके कारण बच्ची को पालना उनके लिए कठिन था और उन्होंने उसको पीपाबाई को सौंप दिया.जबकि,  पेपाबाई पिपलियामंडी के पास अजय टाकीज के साथ मकान में रहती थी. उसका पति एक मोटर मकैनिक है और दोनों का कोई बच्चा नहीं था, जिसके चलते उन्होंनेड ले लिया था. वकीलऔधारी के अनुसारनो पक्षों की सहमति से और बिना पैसो के 21 साल के बच्चों को निसंतान लोग गोद ले सकते हैं. इसमें कानून कोई आपत्ति नहीं कर सकता.
एसडीओपी मल्हारगढ़ प्रदीप बख्शी ने बताया कि उन्होंने बच्ची की जान पहचान करने के लिए पेपाबाई को पुलिस थाने बुलवाया था जबकि, वह वहां नहीं पहुंची. इसलिए अब उस बच्ची के बारे में कमेटी जांच कर रही है और आगे की करवाई बाल संरक्षण कमेटी ही करेगी. पुलिस ने बताया कि गोद लेने के पेपर शायद पेपाबाई के पास नही हा इसीलिए वह अभी तक उनके पास नहीं पहुंची. जब तक वह उन कागज़ातों की पुष्टि नहीं कर लेते, तब तक मामले से पर्दा उठाना कठिन है.