इसरो ने अपना दूसरा मून मिशन चंद्रयान-2 लॉन्च कर दिया है, जिसे देश के
सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया गया है। इसी के साथ ही
चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा
शुरू हो गई है। इसी के साथ जानते हैं, महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में।
सबसे पहले बता दें कि पृथ्वी के ऑर्बिट में जाने का समय करीब एक मिनट
बढ़ा दिया गया है। चंद्रयान-2 अब 974.30 सेकेंड (करीब 16.23 मिनट) में
पृथ्वी से 181.65 किमी की ऊंचाई पर पहुंचेगा।
पृथ्वी के चारों तरफ अंडाकार चक्कर में बदलाव, एपोजी में 60.4 किमी का
अंतर। चंद्रयान-2 लॉन्चिंग के बाद पृथ्वी के चारों तरफ अंडाकार कक्षा में
चक्कर लगाएगा। इसकी पेरिजी (पृथ्वी से कम दूरी) 170 किमी और एपोजी (पृथ्वी
से ज्यादा दूरी) 39120 किमी होगी।
अगर 15 जुलाई को चंद्रयान-2 लॉन्च होता तो इसकी पेरिजी 170.06 किमी और
एपोजी 39059.60 किमी होती। यानी एपोजी में 60.4 किमी का अंतर लाया गया है.
यानी पृथ्वी के चारों तरफ लगने वाला चक्कर कम किया जाएगा।
चंद्रयान-2 की चांद पर जाने के समय में की गई 6 दिन की कटौती
अगर 15 जुलाई को चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक लॉन्च होता तो वह 6 सितंबर को चांद
के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करता, लेकिन आज की लॉन्चिंग के बाद चंद्रयान-2
को चांद पर पहुंचने में 48 दिन ही लगेंगे। यानी चंद्रयान-2 चांद पर 6
सितंबर को ही पहुंचेगा। इसरो वैज्ञानिक इसके लिए चंद्रयान-2 को पृथ्वी के
चारों तरफ लगने वाले चक्कर में कटौती होगी।
अपने दूसरे मून मिशन चंद्रयान-2 के साथ ISRO अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया
में हो सकता है कि छोटा कदम रख रहा हो, लेकिन यह भारत की छवि बनाने के लिए
एक लंबी छलांग साबित हो सकती है, क्योंकि अभी तक दुनिया के पांच देश ही
चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करा पाए हैं। ये देश हैं-अमेरिका, रूस, यूरोप, चीन
और जापान।
हालांकि, भारत रोवर उतारने के मामले में चौथा देश है। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन चांद पर लैंडर और रोवर उतार चुके हैं।