UN का मूल लक्ष्य अभी अधूरा.. कुछ देश समिट में बेवजह ले आते हैं द्विपक्षीय मुद्दे: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (नवम्बर 10, 2020) को SCO समिट (Shanghai Cooperation Organisation Summit) की वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान समेत विश्व के अन्य बड़े नेता शामिल हुए। 


वर्चुअल बैठक में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने अपने 75 साल पूरे किए हैं, लेकिन अनेक सफलताओं के बाद भी संयुक्त राष्ट्र (UN) का मूल लक्ष्य अभी अधूरा है।

पीएम मोदी ने कहा, “महामारी की आर्थिक और सामाजिक पीड़ा से जूझ रहे विश्व की अपेक्षा है कि UN की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आए हैं। अभूतपूर्व कोरोना महामारी के इस अत्यंत कठिन समय में भारत के फार्मा उद्योग ने 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाएँ भेजी हैं। दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में भारत अपनी वैक्सीन उत्पादन और वितरण क्षमता का उपयोग इस संकट से लड़ने में पूरी मानवता की मदद करने के लिए करेगा।”

PM मोदी ने चीन और पाकिस्तान को पूरे समिट में नजरअंदाज किया और उन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एससीओ एजेंडा में बार-बार अनावश्यक रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को लाने के प्रयास हो रहे हैं, जो कि एससीओ चार्टर और शंघाई स्प्रिट का उल्लंघन करते हैं। इस तरह के प्रयास एससीओ को परिभाषित करने वाली सर्वसम्मति और सहयोग की भावना के विपरीत हैं दरअसल, उनका इशारा पाकिस्‍तान की तरफ था, जो अक्सर SCO में कश्‍मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश कर चुका है।

पीएम मोदी ने कहा कि यह एक रेफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिस्म है जो आज की वैश्विक वास्तविकताओं को दर्शाए, जो सभी स्टॉकहोल्डर्स (Stakeholders) की अपेक्षाओं, समकालीन चुनौतियों, और मानव कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा करें। इस प्रयास में हमें एससीओ सदस्य राष्ट्रों का पूर्ण समर्थन मिलने की अपेक्षा है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमने हमेशा आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग के विरोध में आवाज उठाई है। भारत एससीओ चार्टर में निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार SCO के तहत काम करने की अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहा है। परन्तु, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एससीओ एजेंडा में बार-बार अनावश्यक रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को लाने के प्रयास हो रहे हैं, जो एससीओ चार्टर और शंघाई स्पिरिट का उल्लंघन करते हैं। इस तरह के प्रयास SCO को परिभाषित करने वाली सर्वसम्मति और सहयोग की भावना के विपरीत हैं।”

उल्लेखनीय है कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के इस सम्‍मेलन का आयोजन इस बार रूस कर रहा है। भारत और रूस के अलावा इस ग्रुप में चीन, कजाकिस्‍तान, किर्गिस्‍तान, तजाकिस्‍तान, पाकिस्‍तान और उज्‍बेकिस्‍तान शामिल हैं।