भ्रष्टाचार के आरोपों में नवाज शरीफ को देना पड़ा पद से इस्तीफा


भ्रष्टाचार के आरोपों में नवाज शरीफ को देना पड़ा पद से इस्तीफा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ वहां की सत्तारूढ़ पार्टी पी. एम. एल. एन. तथा सर्वाधिक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के मुखिया हैं। वह पहली बार 1990 से 1993 और दूसरी बार 1997 से 1999 तक देश के प्रधानमंत्री रहे जब तत्कालीन सेनाध्यक्ष मुशर्रफ ने उनका तख्ता पलट दिया।

5 जून, 2013 को तीसरी बार प्रधानमंत्री बने नवाज 1990 के दशक में अपने प्रधानमंत्रीकाल के दौरान काला धन छिपाने का एक मामला उजागर होने के बाद गत वर्ष भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए। ‘पनामा पेपर लीक कांड’ के नाम से चर्चित इस केस के अनुसार उस दौरान उन्होंने अवैध रूप से सम्पत्ति अर्जित की। उन्होंने लंदन में 4 फ्लैटों सहित अनेक सम्पत्तियां खरीदीं और इन सम्पत्तियों को खरीदने के लिए नवाज शरीफ के बेटों के स्वामित्व वाली कम्पनियों ने धन उपलब्ध करवाया।

2012 में नवाज की मात्र 26.16 करोड़ रुपए सम्पत्ति थी जो 2014 में 2 अरब का आंकड़ा पार कर गई। इसी सिलसिले में पाक सुप्रीमकोर्ट ने विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा इस बारे दायर याचिकाओं पर सुनवाई के क्रम में नवाज शरीफ और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध लगे आरोपों की जांच के लिए संयुक्त जांच दल (जे.आई.टी.) गठित किया था जिसने आरोपों को सही मानते हुए 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी।

इसमें नवाज शरीफ व उनके बच्चों की जीवनशैली उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक होने के कारण उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने को कहा गया था परंतु नवाज के परिवार ने इन आरोपों को निराधार बताया। सुप्रीमकोर्ट ने 21 जुलाई को इस केस पर सुनवाई पूरी करके अपना फैसला सुरक्षित रखा और 28 जुलाई को पांच जजों की बैंच ने सर्वसम्मति से उक्त प्रकरण में नवाज को दोषी मान कर पद से बर्खास्त करते हुए तुरंत प्रधानमंत्री पद एवं अपनी पार्टी पी.एम.एल.एन. के अध्यक्ष पद से भी त्यागपत्र देने का आदेश जारी कर दिया। वित्त मंत्री इसहाक डार तथा नैशनल असैम्बली के सदस्य मो. सफदर को भी पद के अयोग्य करार दे दिया गया। न्यायालय के अनुसार, ‘‘नवाज शरीफ देश की संसद और अदालतों के प्रति ईमानदार नहीं रहे, लिहाजा उन्हें उनके पद के लिए उपयुक्त नहीं समझा जा सकता।’’

इसके अलावा सुप्रीमकोर्ट ने नवाज की बेटी एवं राजनीतिक उत्तराधिकारी मरियम नवाज, बेटों हसन तथा हुसैन और दामाद कै. सफदर को जांच में शामिल करने व ‘राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो’ (एन.ए.बी.) को उनके विरुद्ध रैफरैंस भेजने तथा उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध 6 सप्ताह के भीतर केस दर्ज करके 6 महीनों में सुनवाई पूरी करने का आदेश भी दे दिया। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद नवाज शरीफ ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया और नवाज के साथ भी तीसरी बार ऐसा ही हुआ है। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि जिस प्रकार बिहार में लालू यादव के बेटे, बेटी और दामाद ने लालू की लुटिया डुबो दी उसी तरह नवाज के बेटों, बेटी और दामाद ने पाकिस्तान में नवाज को सत्ताच्युत करवा दिया।

जैसे कि पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था, इस घोटाले से साफ बच निकले नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज शरीफ का नाम प्रधानमंत्री की दौड़ में सबसे आगे बताया जाता है परंतु इसके लिए उन्हें पहले पाकिस्तान की नैशनल असैम्बली का मैम्बर बनना होगा और इस बीच 45 दिनों की निर्धारित अवधि के दौरान कोई अन्य व्यक्ति अंतरिम प्रधानमंत्री बनेगा। आज पाकिस्तान आतंकवाद का बहुत बड़ा अड्डा बन चुका है और इसी कारण अमेरिका ने इसे आतंकवादियों के लिए शरण देने वाले देशों की सूची में डालने के अलावा उसे 35 करोड़ डालर की सहायता भी रोक दी है। इस समय जब समस्त विश्व पाकिस्तान को शक की दृष्टि से देख रहा है, जो भी प्रधानमंत्री बने उसे अपना एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा। यदि उसने ऐसा न किया तो पहले ही बेकाबू हो रहे आतंकवाद और चरमराई हुई अर्थव्यवस्था के शिकार पाकिस्तान की आंतरिक दशा और भी खराब हो सकती है।