सीताराम का कहना है कि 'पहले तो मैं घबरा गया फिर ख़ुद को संभालते हुए
देखा तो मुझे सभी के हाथों में हथियार दिखाई दिए. इन बदमाशों ने बिल्डिंग
का चैनल गेट भी खोल लिया था, जब मुझे कुछ समझ नहीं आया, तो मैंने बदमाशों
को ललकारा और हवाई फ़ायर किया. बदमाशों को शायद इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि
कोई उन पर फ़ायर भी कर सकता है. इस फ़ायर से वो हड़बड़ा गए और भाग गए. इसके
बाद मैं बिल्डिंग से बाहर निकला, तो देखा कि बैंक के प्राइवेट गॉर्ड प्रमोद
को उन्होंने बांध दिया था. मैंने उसके हाथ-पैर खोले और उसे अंदर ले आया.
इसके बाद मैंने कंट्रोल रूम को सूचना दी, जो 5 मिनट में ही बैंक में आ गई.'
बैंक अधिकारियों के मुताबिक, जिस समय बदमाश यहां घुसे थे उस समय
बैंक में 926 करोड़ रुपये थे, जबकि बैंक की कैश लिमिट 650 करोड़ रुपये थी.
एक सीनियर पुलिस अधिकारी का कहना है कि 'डाका डालने से पहले शायद इन
बदमाशों ने यहां की रेकी की होगी, पर जिस तरह से ये डंडे और सरिये के साथ
बैंक लूटने आये थे उसे देख कर यही लगता है कि इन्हें अंदर के बारे में समझ
नहीं होगी.'
सीताराम की बहादुरी को सम्मानित करने के लिए बैंक ने
अपनी तरफ़ से उन्हें कुछ कैश अमाउंट दिया है. इसके साथ ही राजस्थान पुलिस के
अधिकारियों से भी मांग की है कि सीताराम के नाम की सिफ़ारिश करें.