चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, 3 फीसदी बढ़ा महंगाई भत्ता

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़ाने का फैसला लिया। अब यह 9% से बढ़कर 12% हो जाएगा। देश के 1.1 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनरों को इसका फायदा 1 जनवरी 2019 से मिलेगा। सरकार तीन तलाक पर भी दोबारा अध्यादेश जारी करेगी। यह बिल बजट सत्र में राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था। इसके अलावा किसानों की बंजर जमीन के इस्तेमाल के लिए सोलर पावर योजना को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट के फैसले


    कैबिनेट ने 82 किलोमीटर (68 किमी एलीवेटेड और 14 किमी अंडरग्राउंड) लंबे रीजनल रैपिड ट्रांसिस्ट सिस्टम (आरआरटीएस) के निर्माण को मंजूरी दी। यह दिल्ली से गाजियाबाद और मेरठ के बीच बनेगा। इस पर 30,274 करोड़ रु की लागत आएगी। आरआरटीएस 6 साल में बनकर तैयार होगा। इसके अलावा अहमदाबाद मेट्रो के फेज टू को भी मंजूरी मिली।


    सरकार किसानों की बंजर जमीनों पर सोलर प्लांट लगाने के लिए योजना के तहत सहायता राशि देगी। योजना का नाम कुसुम रखा गया है।


    सोलर जनरेशन के फेस टू में 40 हजार मेगावाट बिजली जोड़ने की मंजूरी मिली है। ऑइल और गैस स्कीम की क्षमता बढ़ाने के लिए नई स्वीकृति दी गई।


    खादी ग्रामोद्योग को 2800 की लागत के साथ तीन और साल के लिए बढ़ाया गया। मिड डे स्कूल को 34 हजार की लागत के साथ अगले तीन साल के लिए बढ़ाया गया। स्वदेशी दर्शन स्कीम 2019-20 के लिए बढ़ाई गई।


4 कानूनों के लिए अध्यादेश जारी करने का फैसला


- तीन तलाक कानून, अनियमित जमा योजना कानून, कंपनी कानून संशोधन के लिए अध्यादेश लाने और इंडियन मेडिकल काउंसिल (संशोधन दूसरा अध्यादेश -2019) को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।

तीन तलाक पर दोबारा अध्यादेश, 6 महीने होती है ऑर्डिनेंस की अवधि

सरकार ने तीन तलाक को अपराध करार देने के लिए दोबारा अध्यादेश जारी करने का फैसला किया है। इससे पहले पिछले साल सितंबर में अध्यादेश जारी किया गया था। इसकी अवधि 6 महीने की होती है। अगर इस दरमियान संसद सत्र आ जाए तो सत्र शुरू होने से 42 दिन के भीतर अध्यादेश को बिल से रिप्लेस करना होता है। इस बार भी बिल राज्यसभा में अटक जाने से सरकार काे दोबारा अध्यादेश लाने का फैसला करना पड़ा।

2017 में आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला


    अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की 1400 साल पुरानी प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार से कानून बनाने को कहा था।


    सरकार ने दिसंबर 2017 में लोकसभा से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित कराया लेकिन राज्यसभा में यह बिल अटक गया, जहां सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। विपक्ष ने मांग की थी कि तीन तलाक के आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान भी हो।


    नए बिल के मुताबिक, आरोपी को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी। मजिस्ट्रेट पीड़ित पत्नी का पक्ष सुनने के बाद वाजिब वजहों के आधार पर जमानत दे सकते हैं। उन्हें पति-पत्नी के बीच सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार होगा।


    बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपी को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएं.